बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में होने जा रहे 9 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी फाइनल कर दिए हैं। बसपा ने इन 9 विधानसभा सीटों में से अभी खैर विधानसभा के लिए अपना कोई प्रत्याशी नहीं दिया है। इन 9 विधानसभा सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है और बसपा भी खैर विधानसभा पर जल्द ही अपना प्रत्याशी घोषित कर देगी।
भाजपा और सपा उत्तर प्रदेश की राजनीति को द्विपक्षीय बनाने के भरसक प्रयास कर रहे हैं और लगातार पैदा हो रहे धार्मिक मुद्दे दोनों ही पार्टियों के लिए लाभप्रद हैं। 2024 में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में बसपा को कोई सफलता हाथ नहीं लगी और वोट का प्रतिशत घट के 9 के आसपास आ गया। इससे पहले हुए 2022 विधानसभा चुनाव में बसपा केवल एक विधायक जिताने में कामयाब रही और वोट का प्रतिशत 13 के आसपास रहा। चुनाव दर चुनाव बहुजन समाज पार्टी का वोट प्रतिशत लगातार गिरता जा रहा है और दलित राजनीतिकी की प्रासंगिकता दिन-ब-दिन कम होती जा रही है। ऐसे में इन उपचुनाव में बसपा का प्रदर्शन बहुत कुछ तय करेगा।
इन सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने में बहुजन समाज पार्टी ने सभी वर्गों धर्म संप्रदाय को नुमाइंदगी देने का प्रयास किया है। अंबेडकर नगर जिले की कटहरी विधानसभा सीट से बसपा ने अमित वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। प्रयागराज जिले की फूलपुर विधानसभा सीट से जितेंद्र कुमार सिंह बसपा के प्रत्याशी होंगे। आरएलडी विधायक के सांसद बन जाने से खाली हुई मुजफ्फरनगर जिले की मीरापुर सीट से बसपा ने शाह नजर को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं कानपुर नगर जिले की सीसामाउ विधानसभा से वीरेंद्र कुमार शुक्ला पर बसपा ने भरोसा जताया हैं। मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा से डॉ अविनाश कुमार शाक्य जबकि मुरादाबाद जिले की कुंदरकी विधानसभा से रफतुल्लाह बसपा प्रत्याशी बनाए गए हैं। गाजियाबाद सदर से बसपा ने परमानंद गर्ग को अपना प्रत्याशी बनाया है और मिर्जापुर जिले की मझवा विधानसभा से दीपक तिवारी बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।

हरियाणा विधानसभा चुनाव में जहां पूर्ण बहुमत की सरकार बनने से भाजपा के हौसले बुलंद है वहीं लगातार हार और घटते वोट प्रतिशत का मुंह देख रही बहुजन समाज पार्टी के सामने चुनौतियां विकराल रूप लिए खड़ी हैं। बसपा की लगातार बनी निष्क्रियता और केवल ट्वीट आधारित राजनीति ने बसपा की रही सही संभावनाओं पर भी पानी फेर दिया है। वैसे भी भाजपा सपा की बाइनरी सेट कर रहा टीवी का मीडिया किसी भी रूप में बसपा को प्रासंगिक नहीं बनने देना चाहता और यह काम बसपा ने खुद आसान कर दिया है।
ऐसे में इन उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी का वोट प्रतिशत 9 से बढ़कर 12 या 15 तक पहुंचता है तो बसपा के लिए एक आशा की किरण जरूर होगी। हालांकि बसपा की वर्तमान राजनीति में ऐसी कोई धार या क्रियाकलाप नहीं नजर आ रहे जिससे यह उम्मीद लगाई जा सके कि बसपा का वोट प्रतिशतअपने आप ही बढ़ जाएगा।

