वैभव कुमार की यह मुहिम अब सिर्फ एक पत्राचार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक पुनर्स्मरण का प्रयास है। यह समय है कि पंजाब सरकार इस मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार करे और रूपनगर को “मान्यवर कांशी राम नगर” नाम देकर इतिहास के इस महानायक को उनकी सही पहचान दे।
दलित न्यूज़ नेटवर्क ब्यूरो
बहुजन राजनीति के पुरोधा और भारत में सामाजिक न्याय के अग्रदूत मान्यवर कांशी राम जी के सम्मान में पंजाब के रूपनगर जिले का नाम बदलकर “मान्यवर कांशी राम नगर” रखने की मांग तेज़ हो गई है। इस मांग को सबसे मुखर रूप में उठाया है पत्रकार और दलित न्यूज़ नेटवर्क के प्रधान संपादक वैभव कुमार ने, जिन्होंने अब तक इस विषय पर कई प्रभावशाली पत्र देश के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों को भेजे हैं।
इतिहास और योगदान को याद करना ज़रूरी
मान्यवर कांशी राम जी का जन्म रूपनगर जिले (पूर्व नाम रोपड़) में हुआ था। उन्होंने न केवल दलित समाज को संगठित किया, बल्कि उन्हें राजनीतिक ताकत भी दी। उनकी अगुवाई में बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में चार बार सरकार बनाई और कई राज्यों में सामाजिक न्याय की राजनीति को मज़बूती दी। वे पंजाब से सांसद भी रहे और उनके नेतृत्व में पार्टी ने पंजाब में तीन लोकसभा सीटें जीती थीं।
वैभव कुमार की प्रमुख चिट्ठियाँ और अपीलें
वैभव कुमार ने इस मांग को लेकर निम्न प्रमुख हस्तियों को पत्र लिखे:
- श्री भगवंत मान (मुख्यमंत्री, पंजाब) को संबोधित पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि नवांशहर को शहीद भगत सिंह नगर और मोहाली को साहिबज़ादा अजीत सिंह नगर का नाम दिया गया, उसी परंपरा में रूपनगर का नाम भी बदला जाना चाहिए।
- पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखकर उन्होंने इस मांग को ऐतिहासिक न्याय बताया।
- AAP नेता और आनंदपुर साहिब के सांसद मलविंदर सिंह कांग को लिखे पत्र में उन्होंने याद दिलाया कि AAP सरकार की जीत में दलित मतदाताओं की भूमिका निर्णायक रही है, और यह नामकरण उनके प्रति सम्मान होगा।
- BSP पंजाब अध्यक्ष अवतार सिंह करमपुरी, पूर्व BSP नेता जसवीर सिंह गढ़ी, और नवांशहर के विधायक नछत्तर पाल को भी उन्होंने पत्र लिखकर संगठनात्मक नैतिक जिम्मेदारी निभाने की अपील की।
- उनके पत्रों में यह भी उल्लेख है कि कांशी राम जी के पैतृक गांव खवासपुर आज भी रूपनगर जिले में स्थित है, और वहां उनका परिवार निवास करता है।
दलित समाज की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा
यह मांग महज एक नामकरण नहीं, बल्कि करोड़ों दलितों की अस्मिता और संघर्ष की पहचान से जुड़ी हुई है। जैसा कि वैभव कुमार ने लिखा है – “यह केवल अनुयायियों की मांग नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के लिए लड़ रहे करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ विषय है।”
राजनीतिक और नैतिक समर्थन की जरूरत
इस मांग को अगर समर्थन मिलता है, तो यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा। इससे यह संदेश जाएगा कि आज की सरकारें उन महान नेताओं को याद रखने में गंभीर हैं, जिन्होंने लोकतंत्र के सबसे कमजोर तबकों को आवाज़ दी।
निष्कर्ष
वैभव कुमार की यह मुहिम अब सिर्फ एक पत्राचार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक पुनर्स्मरण का प्रयास है। यह समय है कि पंजाब सरकार इस मांग पर गंभीरतापूर्वक विचार करे और रूपनगर को “मान्यवर कांशी राम नगर” नाम देकर इतिहास के इस महानायक को उनकी सही पहचान दे।

