केंद्र सरकार की घोषणा से राजनीतिक हलचल
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से अचानक जातीय जनगणना की घोषणा किए जाने के बाद देश की सियासत में खलबली मच गई है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब विपक्षी दल इसे लंबे समय से अपना प्रमुख एजेंडा बनाकर जनता के बीच ले जा रहे थे।
राहुल गांधी ने फैसले का स्वागत किया
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने केंद्र सरकार से जनगणना की स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षण पर लगाई गई 50% की सीमा को खत्म करने के अपने संकल्प को दोहराया।
विपक्षी दलों की रणनीति कमजोर पड़ती नजर आई
अब तक जातीय जनगणना को विपक्षी दल एक मजबूत राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन केंद्र सरकार के इस अप्रत्याशित फैसले से उनकी रणनीति पर असर पड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब विपक्ष को अपने एजेंडे में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।
नई नीतियों की आधारशिला बन सकते हैं आंकड़े
जातीय जनगणना के नतीजे देश की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक तस्वीर को नए सिरे से प्रस्तुत करेंगे। इन आंकड़ों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें सामाजिक न्याय से जुड़ी नई योजनाएं और नीतियां बना सकेंगी। इससे हाशिए पर खड़े समुदायों की हिस्सेदारी तय करने में भी मदद मिलेगी।
2011 की जनगणना अब तक अधर में
गौरतलब है कि 2011 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जातीय जनगणना कराई थी, लेकिन उसके आंकड़े आज तक सार्वजनिक नहीं किए गए। 2014 में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद भी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
राज्य सरकारों की पहल बनी मिसाल
इससे पहले बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण कराए थे, जिनके आधार पर कई नई योजनाएं बनाई गईं। कर्नाटक और हाल ही में तेलंगाना की कांग्रेस सरकार ने भी अपने स्तर पर सर्वे कर आरक्षण में बढ़ोतरी की घोषणा की है।
केंद्र ने विपक्ष का एजेंडा अपनाया?
केंद्र की यह घोषणा विपक्ष के एजेंडे को न सिर्फ चुनौती देती है, बल्कि उसे अपनी ओर मोड़ने की रणनीति भी मानी जा रही है। राहुल गांधी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह “विपक्ष का विजन” था, जिसे अब केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
सियासी बहसों का नया केंद्र बनेगा मुद्दा
जातीय जनगणना का मुद्दा अब आने वाले समय में अखबारों की सुर्खियों और टीवी चैनलों की बहसों का केंद्र बनने जा रहा है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इसकी प्रक्रिया कब शुरू करेगी और इसके नतीजों के आधार पर कैसी नीतिगत दिशा अपनाई जाएगी।

