बिहार के गोपालगंज के मूल निवासी 29 वर्षीय बाबूंद्र कुमार सिंह की पत्नी गर्भवती है. लेकिन इस दुनिया में आने वाला उनका बच्चा और 1 साल की बिटिया अब कभी अपने पिता को नहीं देख पाएंगे. दिल्ली के सरोजिनी नगर में एक कंस्ट्रक्शन साइट में सीवर में साफ सफाई के लिए उतरे बाबूंद्र कुमार सिंह की जान सीवर की जहरीली गैस ने ले ली.
8 अक्टूबर की सुबह यह दोनों मजदूर एक बंद पड़े सीवर की सफाई के लिए दिल्ली के सरोजिनी नगर स्थित इस कंस्ट्रक्शन साइट के सीवर में उतरे. लेकिन जहरीली गैस के चपेट में आकर दोनों लोग बेहोश हो गए. इनको बचाने के लिए तीसरा मजदूर भी सीवर में कूदा.
हमीरपुर के 41 वर्षीय मूलनिवासी राम आसरे सीवर में सफाई के लिए उतरे दो मजदूरों को बचाने के लिए अंदर कूद पड़े. सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी एनबीसीसी कि इस निर्माणाधीन साइट के सीवर में से कचरा निकालना उतरे राम आसरे की भी जान चली गई. पश्चिम बंगाल के 28 वर्षीय श्रीनाथ सोरेन अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं.
पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि तीनों लोगों को बाहर निकालने के लिए सीवर के बगल में बड़ी मशीनों की मदद से गहरा गड्ढा खोदना पड़ा. यह घटना सरोजिनी नगर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पिलंजी गांव में घटित हुई. तीनों मजदूरों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया जिनमें से श्रीनाथ का अभी इलाज चल रहा है.
पुलिस के अनुसार इस मामले में एफआईआर बीऐनएस की धारा 106 के अंतर्गत दर्ज कर ली गई है. हालांकि इस मामले में मैनुएल्स स्कैवेंजिंग एक्ट के प्रावधान नहीं लगाए गए हैं. प्रिंट मीडिया और न्यूज़ पोर्टल की कुछ रिपोर्टर्स के अलावा दिल्ली में अभी इस मुद्दे पर कोई बड़ी चर्चा या धरना प्रदर्शन नहीं आयोजित हुआ है.
दिल्ली एनसीआर और देशभर में लगातार सीवर में मर रहे सफाई कर्मी इस बात की तसदीक करते हैं कि कानून, नियमों और सुरक्षा संबंधी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का देश में कहीं पर भी पालन नहीं हो रहा और सीवर में मौजूद जहरीली गैस के खतरों को लेकर कंस्ट्रक्शन कंपनियों और ठेकेदारों में कोई भी जागरूकता नहीं है. और ऐसा इसलिए क्यूंकी अधिकतर सीवर कर्मी दलित समाज से आते हैं आर दलितों की जान की भारत मे बस इतनी ही कीमत है.

