2024 लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन उत्तर प्रदेश की 43 सीट जीत कर बेहद उत्साहित है. समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने 6 लोकसभा सीट जीतीं हैं। कुछ विधायकों के सांसद चुने जाने पर उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव, सपा और कांग्रेस इस बार भी मिलकर लड़ने वाले हैं.
इन 10 सीटों में से 4 सीट समाजवादी पार्टी के खाते वाली है जबकि चार सीट बीजेपी की हैं. एक सीट राष्ट्रीय लोकदल की है. एक सीट सपा के विधायक इरफान सोलंकी की विधायकी जाने के कारण खाली हुई है। यह विधानसभा सीट हैं खैर, मीरापुर, गाजियाबाद, फूलपुर, मझवा, करहल, मिल्कीपुर, कुंदरकी, सीसामऊ और गाजियाबाद।
इन 10 सीटों के लिए भाजपा गठबंधन में भी सीटों का बंटवारा होना है और इंडिया गठबंधन में भी सपा और कांग्रेस के बीच इन सीटों का बंटवारा होना बाकी है। वैसे इंडिया गंठबंधन की तरफ से अभी तक कोई अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन परिणाम के अनुपात के अनुसार सपा कांग्रेस में 8-2 का बटवारा हो सकता है.
एनडीए गठबंधन में आरएलडी और निषाद पार्टी का भी दावा है क्योंकि मीरापुर से आरएलडी के विधायक चंदन चौधरी बिजनौर सांसद चुने गए है। उधर निषाद पार्टी के मझवा विधानसभा सीट के विधायक विनोद कुमार बिंद भदोही से सांसद चुने गए हैं, इस सीट पर निषाद पार्टी का दावा मजबूत है।
उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी की हालिया यात्रा से राजनीति फिर एक बार गरमा गई है और फिर से उत्तर प्रदेश की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. इन उपचुनाव परिणामों का उत्तर प्रदेश की राजनीति में दूरगामी परिणाम होगा क्यूंकि विधानसभा चुनाव भी 2027 में ही हैं.
यदि भाजपा चुनाव में सफलता प्राप्त करती है तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनैतिक कद बढ़ेगा और योगी आदित्यनाथ से संबंधित अटकलें का दौर खत्म होगा। यदि इसके उलट समाजवादी पार्टी को बढ़त मिलती है तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश यादव का कद बढेगा और भाजपा को लगातार जनता के मुद्दे पर अखिलेश यादव घेरते नजर आएंगे।
उपचुनाव में राष्ट्रीय लोक दल अध्यक्ष जयंत चौधरी के चुनावी कौशल की भी परीक्षा होनी है क्योंकि लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर और कैराना गठबंधन के बावजूद बीजेपी हार गई थी। इसलिए गाजियाबाद, खैर और मीरापुर -पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तीनों ही सीटों पर यदि भाजपा चुनाव नहीं जीत पाती है तो यह बीजेपी-राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।
इन उपचुनावों के लिए भी बहुजन समाज पार्टी और आजाद समाज पार्टी ने भी दावा ठोककर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। यदि आज़ाद समाज पार्टी और बसपा पूरी ताकत से चुनाव लड़ती है और दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक वोटो का बिखराव होता है, ऐसे में भाजपा, इंडिया गठबंधन को कड़ी टक्कर देने वाली है और बीजेपी का पलड़ा भारी भी रह सकता है।
बहुजन समाज पार्टी के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं क्यूंकि लगातार हार का सामना कर रही बसपा को यदि कहीं से भी जीत हाथ लगती है तो बसपा की आगे की राजीनति आसान हो जाएगी. बहनजी ने आकाश आनंद को एक बार फिर से नेशनल कोर्डिनेटर बना दिया है. हालाँकि आकाश आनंद अभी तक अपने पुराने अंदाज़ में लौट नहीं पाए हैं.
अभी इन सीटों के उपचुनाव के लिए कोई अधिसूचना चुनाव आयोग ने जारी नहीं की है, लेकिन हलचल तेज हो चुकी हैं और राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। सभी पार्टियां अपने जीत के दावे ठोक रही हैं और आने वाले दिनों यूपी पूरी तरह राजनैतिक मूड में आ जायेगा।

